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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 10

संयोगिनिस्वयम्बर । ७

बैठि सिंहासन पर राजागे दहिने लिये ढाल तलवार ५३
बैठे क्षत्रिय निज निज आसन मनमें रामचन्द्र को ध्याय ॥
हाथ जोरिकै मन्त्री बोल्यो वो महराज कनउजी राय ५४
देश देश के राजा आये एक न अयो पिथौराराय ॥
सुनिकै बातें ये मन्त्री की जल्दी हुकुम दीन फर्माय ५५
मूरति बनावो तुम कपड़ा की भीतर पैरा देव भराय ॥
जहाँ उतारे जूता जावैं तहँ पर खड़ा देव करवाय ५६
हुकुम पायकै महाराजा को मन्त्री कीन तैसही जाय ॥
मूरति पिथौरा की बनवायो तहँपर खड़ा दीन करवाय ५७
बैठक बैठे सब राजा तहँ आपौ गयो चँदेलाराय ॥
बाजन बाजे चौगिर्दाते हाहाकार शब्दगा छाय ५८
सजिगाकनउजत्यहिऔसरमाँ शोभा कही बूत ना जाय ॥
बन्दनवारे घर घर बाँधे घर घर रहे पताकाछाय ५६
सजीं सुहागिलैं चौगिर्दा ते गावैं गीत मंगलाचार ॥
त्यही समइया त्यहि औसरमाँ बोल्यो कनउजका सरदार ६०
जल्दी लावो संयोगिनि को साइति आयगई नगच्याय ॥
हुकुमपायकै महाराजा का चकरन खबरि जनाई जाय ६१
खबरि पायकै संयोगिनि फिरि महलन तुरत भई हुशियार ॥
औ बुलवायो फिरि बाँदियनको सोलह करनलागि श्रृंगार ६२
सवैया ॥
मज्जेन चीरै औ कुण्डल अंजनै नाकमें मौक्तिकै बेसरसवाँरी ।
कंचुकि औ क्षुद्रावलि कंकण कुसुमित अम्बरं चन्दनधारी ॥
खायकै पान औ धारिमेंहदीनको हार औ नूपुरे की झनकारी ।
सिंदुरे भाल विशाल लखे ललितेमनलज्जितमन्मथनारी ६३