ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 453, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ेंतीसरा अध्याय ] ४३९
उत्तर देता है “एवं तथा” । 'ओम्' दैवी है और 'तथा' मानुषी ।
इस दैवी और मानुषी उत्तर से अध्वर्यु राजा को पाप और
दोष से मुक्त कर देता है । इस लिए जो कोई राजा विजयी हो
(और उसने युद्ध में हत्या की हो) वह चाहे यज्ञ न करे शुनः-
शेप की कथा सुने । ऐसा करने से पाप का लेशमात्र न रहेगा ।
वह आख्याता (होता) को हज़ार गायें दे और प्रतिगरिता
(अध्वर्यु) को सौ । और हर एक को वे स्वर्ण के आसन भी ।
होता को इसके सिवाय खच्चरों सहित चाँदी का रथ । जिनको
सन्तान की कामना हो वह भी शुनःशेप की कथा सुनें । उनको
अवश्य ही सन्तान की प्राप्ति होगी । (६)
ऐतरेय ब्राह्मण की सातवीं पञ्चिका का तीसरा अध्याय समाप्त हुआ ।