ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 427, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ेंदूसरा अध्याय
२—कुछ लोग पूछते हैं कि अगर अग्नि स्थापित करने के
बाद कोई मनुष्य उपवसथ ( यज्ञ के पहले ) के दिन मर जाय
तो उसके यज्ञ का क्या हो ? कुछ लोगों की राय है कि उस
यज्ञ को न करे क्योंकि वह् यज्ञ उसको प्राप्त नहीं होता ।
कुछ पूछते हैं कि अगर कोई अग्निहोत्री अग्नि स्थापित कर
सान्नाय्य या दूसरी आहुतियों के पीछे मर जाय तो इसका क्या
प्रायश्चित्त है ? इसका यही प्रायश्चित है कि सब चीज़ों को इकट्ठा
करके जला दे ।
कुछ पूछते हैं कि हवियों का सामान इकट्ठा करने के पीछे
कोई मर जाय तो उसका क्या प्रायश्चित्त है ? इसका प्रायश्चित्त
यही है कि जिन जिन देवताओं के लिये जो जो हवि इकट्ठी
की गई उस-उस को उस-उस देवता के लिये "स्वाहा" कह कर
आहवनीय अग्नि में दे दे ।
कुछ लोग पूछते हैं कि अगर अग्निहोत्री प्रवास में ( घर से
दूर ) मर जाय तो उसके यज्ञ का क्या हो ? ऐसी गाय के
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