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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 317, कुल 592 में से

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पृष्ठ 317

दूसरा अध्याय ] ३०३
सविता का निविद् सूक्त यह है :—
उदुष्य देवः सविता दमूना हिरण्यपाणिः प्रतिदोषमस्थात् । अयो
हनूर्यजतो मन्द्रजिह्व आदाशुषे सुवति भूरिवामम् ॥ ( ६।७१।४-६ )
इसमें 'दाशुषे सुवति भूरिवामम्' इस वाक्य में 'वाम' शब्द
पड़ा है । यह पशु रूप है । पांचवें दिन का यही रूप होता है ।
द्यावापृथिवी का निविद् सूक्त है ।
मही द्यावापृथिवी इहज्येष्ठे ( ४।५६ )
इसमें 'ऋवृद्धोता' शब्द आया है ।
ऋवृद्धोता प्रथमानेभिरेवैः ( ४।५६।१ )
यह पशु रूप है । यह पांचवें दिन का रूप है ।
ऋभुओं का निविद् सूक्त यह हैं ।
ऋभुर्विभ्वा वाज इन्द्रो नो अच्छ ( ४।३४ )
पशु वाज हैं । यह पशु रूप है। यह पांचवें दिन का रूप है ।
स्तुषे जनं सुव्रतं नवासीभिः······( ६।४९।१ )
यह वैश्वदेव का अध्यास है । यह पशु रूप है । यह पांचवें
दिन का रूप है ।
अग्नि-मारुत् शस्त्र का प्रतिपद् यह है :—
हविष्पान्तमजरं स्वर्विदि दिविस्पृश्याहुतं जुष्टमग्नौ । तस्य भर्मणे
भुवनाय देवा धर्मणे कं स्वधया पप्रथन्त ॥ ( ऋ० १०।८८।१ )
'हविष्मत्' पांचवें दिन का रूप है ।
मरुतों का निविद् सूक्त यह है :—
वपुर्नु तच्चिकितुषे चिदस्तु । ( ऋ० ६।६६।१ )
इसमें वपु शब्द आया है । यह पांचवें दिन का रूप है ।
धाय्या वही है...जातवेदसे सुनवाम सोमम् ।
अग्निहोता गृहपतिः स राजा विश्वा वेद जनिमा जातवेदाः । देवा-
नामुत यो मर्त्यानां यजिष्ठः स प्र यजतामृतावा ॥ ( ऋ० ६।१५।१३ )
यह जातवेद का अध्यास पशुरूप है । यह पांचवें दिन का
रूप है । ( ३ )