ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 311, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ेंदूसरा अध्याय
६—पाँचवें दिन का देवता गौ है। स्तोम त्रिणव है।
साम शक्वर है, छन्द पंक्ति है। जो यह जानता है कि कौन
देवता है, कौन स्तोम है, कौन साम है और कौन छन्द है उसका
यज्ञ सफल होता है।
जिसमें 'आ' और 'प्र' न हो और जो 'स्थित' हो वह
पांचवें दिन का रूप है। दूसरे दिन के रूप भी पांचवें दिन
के रूप हैं, जैसे ऊर्ध्व, प्रति, अन्तः, वृषन्, वृधन्। बीच के पाद
में देवता का निर्वचन और अन्तरिक्ष का उल्लेख। इनके सिवाय
यह विशेषतायें और हैं:—
दुग्ध, ऊध, धेनु, पृश्नि, मद, पशुओं का रूप, अभ्यास
(अर्थात् घटना बढ़ना) क्योंकि पशु बड़े छोटे होते हैं। पांचवां
दिन जागत है अर्थात् जगत् से सम्बन्ध रखता है, पशु जगत्
है (चलता फिरता) है; यह बार्हत भी है क्योंकि बृहती छन्द
पशुओं का है। यह पांक्त भी है क्योंकि पशु पंक्ति छन्द से
सम्बन्ध रखते हैं। यह 'वाम' है क्योंकि पशु उलटे हैं। यह
हविष्मत् है क्योंकि पशु हवि हैं। यह वसुमत है क्योंकि पशुओं
( २९७ )