ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 298, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ें२८४ [पाँचवीं पञ्चिका
त्रिषधस्था सप्तधातुः पञ्चजाता वर्धयन्ती । वाजे वाजे हव्या भूत् ॥
(ऋ० ६।६१।१०-१२)
यह सब उष्णिक् छन्द में हैं और इनमें समानोदर्क है । यह
तीसरे दिन का रूप है ।
मरुत्वतीय शस्त्र का प्रतिपद् यह है :—
तन्तमिन्द्राधसे मह इन्द्रं चोदामि पीतये । यः पूर्व्यामनुष्टुतिमीशे
कृष्टीनां नृतुः ॥ (ऋ० ८।६८।७)
न यस्य ते शवसान सख्यमानंश मर्त्यः । नकिः शवांसि ते नशत् ॥
(ऋ० ८।६८।८)
त्वोतासस्त्वा युजाऽप्सु सूर्ये महद्धनम् । जयेम पृत्सु वज्रिवः ॥
(ऋ० ८।६८।९)
इसका अनुचर यह है :—
त्रय इन्द्रस्य सोमाः सुतासः सन्तु देवस्य । स्वे क्षये सुतपान्व ॥
त्रयः कोशासः श्चोतन्ति तिस्रश्चम्वः सुपूर्णाः । समाने अधिमार्मन् ॥
शुचिरसि पुरुनिःष्ठाः क्षीरैर्मन्थत आशीर्तः । दध्ना मन्दिष्ठः
शूरस्य ॥ (ऋ० ८।२।७-९)
इनमें 'नृतुः' और 'त्रयः' यह शब्द आये हैं । यह तीसरे
दिन का रूप है ।
इन्द्र-निहिव प्रगाथ वही है—इन्द्रनेदीय... (ऋ० ८।५३।५-७)
ब्रह्मणस्पति प्रगाथ यह है :—
प्रनूनं ब्रह्मणस्पतिर्मन्त्रं वदत्युक्थ्यम् । यस्मिन्निन्द्रो वरुणो मित्रो
अर्यमा देवा ओकांसि चक्रिरे ॥
तमिद्धोचेमा विदथेषु शम्भुवं मन्त्रं देवा अनेहसम् । इमां च
वाचं प्रतिहर्यथा नरो विश्वेद् वामा वो अश्नवत् ॥ (ऋ० १।४०।५-६)
इसमें स्वरों की समानता है । यह तीसरे दिन का रूप है ।
धाय्या वही है :—
अग्निनेता (ऋ० ३।२०।४)