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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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२७६ [ चौथी पञ्चिका
उदुष्य देवः सविता हिरण्यया......... (ऋ० ६।७१)
इसमें उत् शब्द ऊर्ध्व का सार्थक है। यह दूसरे दिन का
रूप है।
द्यावापृथिवी का निविद् सूक्त यह है :—
"ते हि द्यावा पृथिवी विश्वशंभुव" (ऋ० १।१६०)
इसमें 'अन्तः' शब्द आया है। यह दूसरे दिन का रूप है।
ऋभुओं का निविद् सूक्त यह है :—
तक्षन् रथं सुवृतं विद्मनापस...... (ऋ० १।१११)
इस सूक्त में :—
"तक्षन् हरी इंद्रवाहा वृषण्वसू..." इस मंत्र में 'वृषन्' शब्द
आया है। यह दूसरे दिन का रूप है।
वैश्वदेव निविद् सूक्त यह है :—
यज्ञस्य वो रथ्यं विश्पतिं विशाम्......। (ऋ० १०।६२)
इस सूक्त के "वृषा केतुर्यजतोद्यामशायत" में वृषन् शब्द
आया है। यह दूसरे दिन का रूप है।
इस सूक्त का ऋषि शार्यात है। जब अंगिरा लोग स्वर्ग-
लोक में जाने के लिये सत्र कर रहे थे तब षडह के दूसरे दिन
का कृत्य करने में भूल चूक कर जाते थे। मनु के पुत्र शार्यात
ने 'यज्ञस्य रथं' वाला सूक्त दूसरे दिन पढ़वाया। इससे वह यज्ञ
को जान गये और स्वर्गलोक को पहुँच गये। दूसरे दिन होता
इस सूक्त को इसलिये पढ़ता है कि यज्ञ का ज्ञान हो जाय और
स्वर्गलोक प्राप्त हो जाय।
अग्नि-मारुत शस्त्र का प्रतिपद् यह है :—
पृक्षस्य वृष्णो अरुषस्य नू सहः......(ऋ० ६।८)
इसमें वृषन् शब्द आया है। यह दूसरे दिन का रूप है।
अग्नि मारुत शस्त्र में मरुतों का निविद् सूक्त यह है :—
वृष्णो शर्धाय सुम्नाय वेधसे......(ऋ० १।६४)