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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 147, कुल 592 में से

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पृष्ठ 147

चौथा अध्याय
२५-सोम राजा का पहले पान करने के लिये देव झगड़
पड़े। उन्होंने चाहा कि "मैं पहले पिऊँ", "मैं पहले पिऊँ।"
अब वे इस बात पर राजी हुये कि बाजी लगाकर दौड़ें। जो
जीत जाय वही पहले पीले। ऐसा कह कर वह दौड़े। जितने
दौड़े थे उनमें वायु पहले नियत स्थान पर पहुँचा, फिर इन्द्र,
फिर मित्र और वरुण, फिर दोनों अश्विन। इन्द्र यह सोच
कर कि मैं वायु से आगे पहुँचूँ, (ऐसा दौड़ा कि) वायु के
पास ही गिर पड़ा। तब उसने कहा, "हम दोनों साथ आये
हैं इसलिये दोनों जीते हैं"। उस (वायु) ने कहा, "नहीं मैं
ही जीता हूँ"। इन्द्र ने कहा, "तीसरा भाग मुझे मिले, हम
दोनों जीते हैं"। उस (वायु) ने कहा, "नहीं, मैं ही जीता
हूँ।" तब इन्द्र ने कहा, "चौथाई मुझे मिले, हम दोनों जीते हैं"।
वायु मान गया और चौथाई भाग इन्द्र को मिला। तभी से
इन्द्र को चौथाई भाग मिलता है और वायु को तीन भाग।
इस प्रकार इन्द्र और वायु दोनों जीते। फिर मित्र और वरुण।
फिर दोनों अश्विन। वह जिस जिस क्रम से जीते उसी क्रम से
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