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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 137, कुल 592 में से

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पृष्ठ 137

तीसरा अध्याय
१९-ऋषियों ने सरस्वती के किनारे सत्र करते हुये कवष
को जो इलूषा का पुत्र था यह कह कर सोम यज्ञ से निकाल
दिया, "यह दासीपुत्र, ज्वारी, अब्राह्मण हमारे मध्य में दीक्षा
को कैसे प्राप्त करेगा।" उन्होंने उसको रेगिस्तान में निकाल
दिया कि वह प्यासा मर जाय और सरस्वती का पानी न पी
सके। उसने रेगिस्तान में जाकर प्यास से तंग आकर अपोनप्त्रीय
मंत्रों को देखा :-
"प्रदेवत्रा ब्रह्मणे गातुरेतु... इति" ( ऋ० १०।३० )
ꕤ इस "अपां न पात्" सूक्त में १५ मंत्र हैं जो नीचे दिये जाते
हैं -
प्र देवत्रा ब्रह्मणे गातुरेत्वपो अच्छा मनसो न प्रयुक्ति ।
महीं मित्रस्य वरुणस्य धासिं पृथुज्रयसे रीरधा सुवृक्तिम् ॥१॥
अध्वर्यवो हविष्मन्तो हिभूताऽच्छाप इतो शतीरुशन्तः।
अव याश्चष्टे अरुणः सुपर्णस्तमास्यध्वमूर्भिमद्या सुहस्ताः ॥२॥
अध्वर्यवोडप इता समुद्र मपां नपातं हविषा यजध्वम् ।
स वो दददूर्भिमद्या सुपूतं तस्मै सोमं मधुमन्तं सुनोत ॥३॥
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