ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१०८ [ दूसरी पत्रिका
नामानि चिद्दधिरे यज्ञियानि भद्रायां ते रणयन्त संदृष्टौ ॥
( ऋ० ६।१।४ )
[ (नमसा) नमस्कार द्वारा (देवस्य पदं व्यन्तः) देव के पद
को प्राप्त होते हुये (श्रवस्यवः) अन्न चाहने वालों ने (अमृक्तम्)
अक्षय (श्रवः) अन्न को (आपन्) प्राप्त किया । (ते भद्रायां
सन्दृष्टौ रणयन्तः) तेरी कल्याणकारक स्थिति में रमण करते हुये
लोगों ने (यज्ञियानि नामानि) पूज्य नामों को (दधिरे) धारण
किया । ]
त्वां वर्धन्ति क्षितयः पृथिव्यां त्वां राय उभयासो जनानाम् ।
त्वं त्राता तरणे चेत्यो भूः पिता माता सदमिन् मानुषाणाम् ॥
( ऋ० ६।१।५ )
[ हे अग्नि ! (त्वां) तेरी (क्षितयः) मनुष्य (पृथिव्यां) पृथिवी
पर (वर्धन्ति) प्रशंसा करते हैं । (जनानाम्) मनुष्यों के
(उभयासः) दोनों लोक सम्बन्धी (रायः) धन (त्वां) तुझको बढ़ाते
हैं। (तरणे) हे तारने वाले (चेत्यः) चिन्तन करने के योग्य होकर
(त्राता अभूः) तू रक्षक हो गया है । (सदमित्) सदा (मानुषा-
णाम्) मनुष्यों का (पिता) बाप और (माता) माता है। ]
सपर्यंण्यः स प्रियोविक्ष्वग्निर्होता मन्द्रोनिषसादा यजीयान् । तं त्वा वयं
दम आ दीदिवांसमुप ज्ञुबाधो नमसा सदेम ॥ ( ऋ० ६।१।६ )
[ (अग्ने) हे अग्नि ! (सहसः सूनो) साहस के उत्पन्न करने
वाले हम (अस्मै ते मन्हे) उस तुझ बड़े की (महि विधेम)
बहुत पूजा करें (समिधा) समिधा द्वारा (नमोभिः) स्तुतियों
द्वारा (हव्यैः) हव्य द्वारा । (वेदी) वेदी में (गीर्भिः) गीतों
द्वारा (उक्थैः) स्तोत्रों द्वारा । (ते भद्रायां सुमतौ यतेम) तेरी
कल्याणकारक सुमति के लिये कोशिश करें । ]
आदस्ततन्थ रोदसी वि भासा श्रवोभिश्च श्रवस्यस्तरुत्रः । बृहद्भि-
र्वाजैः स्थविरेभिरस्मे रेवद्द्भिरग्ने वितरं वि भाहि ॥ ( ऋ० ६।१।११ )