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आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning

महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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पृष्ठ 31

आदित्यहृदयस्तोत्रम् ३१
परम पराक्रमी रघुनाथजीने धनुष उठाकर रावणकी ओर देखा और
उत्साहपूर्वक विजय पानेके लिये वे आगे बढ़े। उन्होंने पूरा प्रयत्न करके
रावणके वधका निश्चय किया। उस समय देवताओंके मध्यमें खड़े हुए
भगवान् सूर्यने प्रसन्न होकर श्रीरामचन्द्रजीकी ओर देखा और निशाचरराज
रावणके विनाशका समय निकट जानकर हर्षपूर्वक कहा—'रघुनन्दन !
अब जल्दी करो'॥ २८—३१॥
‘Hearing this advice, Śrī Rāma (scion of Raghu), who was
endowed with extraordinary energy and had a subdued mind, found
his grief immediately dissipated. Nay, feeling greatly delighted, he
retained the alleluia in his memory. Sipping water thrice (with the
name of the Lord on his lips) and getting purified (in this way),