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सर्वकोश
आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning

महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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पृष्ठ 30

आदित्यहृदयस्तोत्रम् ३०
आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्।
त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान् ॥ २९ ॥
रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागमत्।
सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत् ॥ ३० ॥
अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमनाः परमं प्रहृष्यमाणः।
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥ ३१ ॥
'उनका उपदेश सुनकर महातेजस्वी श्रीरामचन्द्रजीका शोक दूर
हो गया। उन्होंने प्रसन्न होकर शुद्धचित्तसे आदित्यहृदयको धारण किया
और तीन बार आचमन करके शुद्ध हो भगवान् सूर्यकी ओर देखते
हुए इसका तीन बार जप किया। इससे उन्हें बड़ा हर्ष हुआ। फिर