अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)
Abhidharmakosha and Bhashya of Vasubandhu with Commentary
आचार्य वसुबन्धु (टीकाकार: यशोमित्र, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 997, कुल 1258 में से
संदर्भ में पढ़ें"? No, "सास्रवाऽनास्रवाश्चोत्पद्यन्ते" or "सास्रवोऽनास्रवश्चोत्पद्यन्ते"?
Wait! Let's check the text of Sphutartha on 6.45:
"तद्यथा स्रोतआपन्नः शमथचरितो लौकिकेन मार्गेण वैराग्यं गच्छन् प्रतिप्रकारं विसंयोगप्राप्तयः सास्रवा अनास्रवाश्चोत्पद्यन्ते।" or "सास्रवाऽनास्रवाश्चोत्पद्यन्ते"?
Wait, look at the image:
"सा स्र वो [or वा?] ऽ ना स्र व [or वा?] श्चो [or श्च?] त्प द्य न्ते ।"
Wait, look at 'श्च':
Does 'श्च' have an o-matra?
Wait, if it is "श्चोत्पद्यन्ते" = च + उत्पद्यन्ते!
च (ca) + उत्पद्यन्ते (utpadyante) = चोत्पद्यन्ते (cotpadyante)!
Aha! च + उत्पद्यन्ते = चोत्पद्यन्ते!
Then before 'च' is 'सास्रवा अनास्रवाश्चोत्पद्यन्ते'?
Wait, if it's सास्रवा + अनास्रवाः + च + उत्पद्यन्ते:
सास्रवा + अनास्रवा = सास्रवाऽनास्रवाः (or सास्रवा अना