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सर्वकोश
अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

Abhidharmakosha and Bhashya of Vasubandhu with Commentary

आचार्य वसुबन्धु (टीकाकार: यशोमित्र, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished1,258 पृष्ठ

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पृष्ठ 945

९२४ भाष्यस्फुटार्थासहितेऽभिधर्मकोशे [ मार्गपुद्गल-
ततोऽत्रैव धर्मज्ञानम्,
ततः पुनर्दुःखे धर्मज्ञानक्षान्तेरनन्तरमत्रैव कामावचरे दुःखे धर्मज्ञान-
मुत्पद्यते। तद् दुःखे धर्मज्ञानमित्युच्यते। अनास्रवाधिकारः सर्वत्र वेदितव्यः।
यथा च कामावचरे दुःखे धर्मज्ञानक्षान्तिर्धर्मज्ञानं चोत्पद्यते
तथा पुनः।
शेषे दुःखेऽन्वयक्षान्तिज्ञाने,
दुःखे धर्मज्ञानानन्तरं रूपारूप्यावचरे दुःखे समस्तालम्बनान्वयज्ञानक्षान्ति-
रुत्पद्यते। सा दुःखे अन्वयज्ञानक्षान्तिरित्युच्यते। ततः अन्वयज्ञानमुत्पद्यते।
तद् दुःखेऽन्वयज्ञानमित्युच्यते। प्रथमो धर्मतत्त्वज्ञानाद्धर्मज्ञानम्, तदन्वयादूर्ध्वं
दुःखालम्बनमन्वयज्ञानम्; तथैवानुगमात्।
यथा चैतानि दुःखसत्ये चत्वारि क्षान्तिज्ञानान्युत्पद्य