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सर्वकोश
अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

Abhidharmakosha and Bhashya of Vasubandhu with Commentary

आचार्य वसुबन्धु (टीकाकार: यशोमित्र, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished1,258 पृष्ठ

पृष्ठ 72, कुल 1258 में से

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पृष्ठ 72

ामाश्रयः स इति कृत्वा षष्ठाश्रयप्रसिद्धिर्न भवति । षष्ठस्याप्य-

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यमाश्रयो भवति, सम्भवतः । आलम्बनषट्कमपि, चक्षुर्विज्ञानधातोरालम्बनं

Line 17:
रूपधातुर्यवन्मनोविज्ञानधातोर्धर्मधातुरालम्बनमिति ।
Wait, "रूपधातुर्यवन्मनोविज्ञानधातोर्धर्मधातुरालम्बनमिति ।" - let's check "र्यवन्" vs "र्यावन्". It is printed as "र्यवन्" (or "र्यावन्" with very faint aa-matra, but clearly "र्यवन्" is visible).

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तदिदं विचार्यते—किं यथा चक्षुर्विज्ञानधातोर्यावन्ति रूपाण्यालम्बनं स

Line 19:
रूपधातुः, एवं यावत्कायविज्ञानधातोर्यावन्ति स्प्रष्टव्यान्यालम्बनं स स्प्रष्टव्य-

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धातुः, एवं मनोविज्ञानधातोर्यावन्तो धर्मा आलम्बनं स धर्मधातुरिति ? अत्र

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स्थविर आह—सर्वधर्मस्वभावो धर्मधातुः । अष्टादशधातुस्व