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सर्वकोश
अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

Abhidharmakosha and Bhashya of Vasubandhu with Commentary

आचार्य वसुबन्धु (टीकाकार: यशोमित्र, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished1,258 पृष्ठ

पृष्ठ 398, कुल 1258 में से

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पृष्ठ 398

Wait, does it have an 'े' matra on 'त्त'?
Look at line 1: "कुशले चित्त इति वक्तव्यम् ।"
Wait! There is NO 'े' on 'चित्त'! It is literally "चित्त इति" (sandhi: चित्ते + इति -> चित्त इति, where e drops before i in arsha/classical hiatus, or just printed without e).
Wait, look at line 5:
"तत्र सप्तानां कुशले चित्ते इति वक्तव्यं न षण्णामिति तद्दर्शयन्नाह—कामाव-"
Here in line 5, it DOES have 'े': "चित्ते इति"!
In line 1, it says: "चित्त इति"!

Wait, let's check line 10:
"यदाकाशानन्त्यायतन-"
Wait, is it यदाकाश or यदाकाश?
'य', 'द', 'ा', 'क', 'ा', 'श', 'ा', 'न', 'न', '्' 'त', '्' 'य', 'ा', 'य', 'त', 'न'
Wait: 'यदा' + 'आकाश...' = 'यदाकाश...'!
Yes: "यदाकाशानन्त्यायतन-"

Let's check line 12:
"धर्मज्ञानक्षान्तिकलापस्य लाभः ।"
Wait, line 12 ends with:
"तदा शै