अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)
Abhidharmakosha and Bhashya of Vasubandhu with Commentary
आचार्य वसुबन्धु (टीकाकार: यशोमित्र, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 122, कुल 1258 में से
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Wait, "प्रतिलभमान ।" (no visarga).
Then single quote: 'स्याद्
Line 21:
"रूपधातुना न चक्षुर्धातुना' इति इयं कोटिर्नास्ति । सहापि स्यात् । उभयेना-"
Line 22:
"समन्वागतः समन्वागमं प्रतिलभते, आरूप्यधातोश्च्युतो रूपधातौ कामधातौ"
Line 23:
"चोपपद्यमान । नोभयेनेतानाकारान् स्थापयित्वा । यश्चक्षुर्धातुना समन्वा"
Wait, at the end of line 23: "समन्वा" without hyphen, wraps to "गतो" on line 24.
And "चोपपद्यमान ।" - no visarga.
Line 24:
"गतो रूपधातुनापि स-इति पूर्वपादक. । यस्तावच्चक्षुर्धातुना समन्वागतो"
Wait, "स-इति पूर्वपादक. ।" -> hyphen between स and इति! And dot after पूर्वपादक.
Line 25:
"रूपधातुनापि सः । स्याद् रूपधातुना न चक्षुर्धातुना कललाद्यवस्थास्वलब्ध-"
Line 26:
"चक्षुर्लब्धविहीनचक्षुश्च । यश्चक्षुर्विज्ञानधातुनाऽसमन्वागत. समन्वागमं