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सर्वकोश
अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

Abhidharmakosha and Bhashya of Vasubandhu with Commentary

आचार्य वसुबन्धु (टीकाकार: यशोमित्र, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished1,258 पृष्ठ

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पृष्ठ 1151

"?
The letter is 'नि' or 'वि'?
It has a loop at bottom left: 'नि'!
Wait, could it be "मिथ्यानिध्यानादित्यर्थः"? No, look at the repha on 'र्णा'!
Wait, "नितीर्णात्"? No, 'ती' + 'र्णा' = तीर्णा!
Wait, "मिथ्या नितीर्णादित्यर्थः" (or "मिथ्यानितीर्णादित्यर्थः").
Let's look at the letters:
म + ि = मि
थ + य + ा = थ्या
न + ि = नि
त + ी + र् = तीर्
ण + ा = णा
द + ि = दि
त + य + ः = त्यर्थः
Yes, "मिथ्यानितीर्णादित्यर्थः ।" (meaning: incorrectly deliberated/decided, from ni + tṝ / nitīrṇa).

Line 23:
"कामरागपर्यवस्थितेनापि चेतसा मिथ्योपनिध्यानात् तत्प्रसङ्गः । न; तत्प्रति-"
Wait, is there a semicolon after 'न'?
Yes: "न; तत्प्रति-"

Line 24:
"रूप एवेति विस्तरः । नैतदेवमतिप्रसङ्ग इति । तत्प्रतिरूप एव हि नाति-"

Line 25:
"बहुविलक्षणे क्लिष्टे ध्यानमिति संज्ञासन्निवेशः