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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पद्यार्धानुक्रमणी महावीरी व्याख्या
जनम जनम के दुख बिसरावै (चौ. ३३, उत्तरार्ध) ....................... ७२
जपत निरंतर हनुमत बीरा (चौ. २५, उत्तरार्ध) ....................... ६२
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते (चौ. १५, पूर्वार्ध) ....................... ४३
जय कपीश तिहुँ लोक उजागर (चौ. १, उत्तरार्ध) ....................... १७
जय जय जय हनुमान गोसाईं (चौ. ३७, पूर्वार्ध) ....................... ७६
जय हनुमान ज्ञान-गुण-सागर (चौ. १, पूर्वार्ध) ....................... १७
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं (चौ. १९, उत्तरार्ध) ................... ५२
जहाँ जन्म हरि-भगत कहाई (चौ. ३४, उत्तरार्ध) ....................... ७३
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू (चौ. १८, पूर्वार्ध) ....................... ४९
जो यह पढ़ै हनुमान-चलीसा (चौ. ३९, पूर्वार्ध) ....................... ७८
जो शत बार पाठ कर कोई (चौ. ३८, पूर्वार्ध) ....................... ७७
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा (चौ. ३६, उत्तरार्ध) ....................... ७५
तासु अमित जीवन फल पावै (चौ. २८, उत्तरार्ध) ....................... ६५
तिन के काज सकल तुम साजा (चौ. २७, उत्तरार्ध) .................... ६४
तीनों लोक हाँक ते काँपे (चौ. २३, उत्तरार्ध) ....................... ५९
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा (चौ. १६, पूर्वार्ध) ....................... ४५
तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई (चौ. १२, उत्तरार्ध) .................... ४०
तुम रक्षक काहू को डर ना (चौ. २२, उत्तरार्ध) ....................... ५८
तुम्हरे भजन राम को पावै (चौ. ३३, पूर्वार्ध) ....................... ७२
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना (चौ. १७, पूर्वार्ध) ....................... ४७
तुलसीदास सदा हरि-चेरा (चौ. ४०, पूर्वार्ध) ....................... ७९
तेज प्रताप महा जग-बंदन (चौ. ६, उत्तरार्ध) ....................... २७
दुर्गम काज जगत के जे ते (चौ. २०, पूर्वार्ध) ....................... ५३
नारद सारद सहित अहीशा (चौ. १४, उत्तरार्ध) ....................... ४२
नासै रोग हरै सब पीरा (चौ. २५, पूर्वार्ध) ......................... ६२
पवनतनय संकट-हरन मंगल-मूरति-रूप (उ.दो., पूर्वार्ध) ................. ८०
प्रभु-चरित्र सुनिबे को रसिया (चौ. ८, पूर्वार्ध) ....................... ३१
प्रभु-मुद्रिका मेलि मुख माहीं (चौ. १९, पूर्वार्ध) ....................... ५२
बरनउँ रघुबर-बिमल-जस जो दायक फल चारि (म.दो. १, उत्तरार्ध) ......... १२
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेश बिकार (म.दो. २, उत्तरार्ध) ......... १५
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