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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 99, कुल 110 में से

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महावीरी व्याख्या पद्यार्धानुक्रमणी
बिकट रूप धरि लंक जरावा (चौ. ९, उत्तरार्ध) ................................. ३३
बिद्यावान गुणी अति चातुर (चौ. ७, पूर्वार्ध) ................................. २९
बुद्धि-हीन तनु जानिकै सुमिरौं पवनकुमार (म.दो. २, पूर्वार्ध) ................. १५
भीम रूप धरि असुर सँहारे (चौ. १०, पूर्वार्ध) ................................. ३५
भूत पिशाच निकट नहिं आवै (चौ. २४, पूर्वार्ध) ................................ ६१
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै (चौ. २६, उत्तरार्ध) .............................. ६३
महाबीर जब नाम सुनावै (चौ. २४, उत्तरार्ध) ................................. ६१
महाबीर बिक्रम बजरंगी (चौ. ३, पूर्वार्ध) ................................... २१
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई (चौ. १२, पूर्वार्ध) ................................ ४०
राम-काज करिबे को आतुर (चौ. ७, उत्तरार्ध) ................................. २९
रामचंद्र के काज सँवारे (चौ. १०, उत्तरार्ध) ................................. ३५
राम-दुआरे तुम रखवारे (चौ. २१, पूर्वार्ध) ................................. ५४
राम-दूत अतुलित-बल-धामा (चौ. २, पूर्वार्ध) ................................ १९
राम मिलाय राज-पद दीन्हा (चौ. १६, उत्तरार्ध) .............................. ४५
राम-रसायन तुम्हरे पासा (चौ. ३२, पूर्वार्ध) ................................. ७१
राम-लखन-सीता-मन-बसिया (चौ. ८, उत्तरार्ध) ................................ ३१
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर-भूप (उ.दो., उत्तरार्ध) ................... ८०
लंकेश्वर भए सब जग जाना (चौ. १७, उत्तरार्ध) .............................. ४७
लाय सँजीवनि लखन जियाये (चौ. ११, पूर्वार्ध) .............................. ३९
लील्यो ताहि मधुर फल जानू (चौ. १८, उत्तरार्ध) .............................. ४९
शंकर स्वयं केसरीनंदन (चौ. ६, पूर्वार्ध) ................................... २७
श्रीगुरु-चरन-सरोज-रज निज-मन-मुकुर सुधारि (म.दो. १, पूर्वार्ध)............... १२
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये (चौ. ११, उत्तरार्ध) ................................ ३९
संकट कटै मिटै सब पीरा (चौ. ३६, पूर्वार्ध) ................................. ७५
संकट तें हनुमान छुड़ावै (चौ. २६, पूर्वार्ध) ................................. ६३
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा (चौ. १४, पूर्वार्ध) ................................ ४२
सब-पर राम राय-सिरताजा (चौ. २७, पूर्वार्ध) ................................ ६४
सब सुख लहहिं तुम्हारी शरना (चौ. २२, पूर्वार्ध) .............................. ५८
सहसबदन तुम्हरो जस गावैं (चौ. १३, पूर्वार्ध) ................................ ४१
सादर हौ रघुपति के दासा (चौ. ३२, उत्तरार्ध) ................................ ७१
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