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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1719 of 1855

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Page 1719

इह प्र ब्रूहि यतमः सो अग्ने यो यातुधानो य इदं कृणोति.
तमा रभस्व समिधा यविष्ठ नृचक्षसंश्कक्षुषे रन्धयैनम्.. (८)
हे अग्नि! उस राक्षस को भगाओ जो यज्ञ में विघ्न डालता है. हे अतिशय युवा अग्नि!
तुम समिधाओं द्वारा प्रज्वलित होकर राक्षस को मारो. हे मानवों को देखने वाले अग्नि! तुम
राक्षस को अपने तेज के वश में करो. (८)
तीक्ष्णेनाग्ने चक्षुषा रक्ष यज्ञं प्राञ्चं वसुभ्यः प्र णय प्रचेतः.
हिंस्रं रक्षांस्यभि शोशुचानं मा त्वा दभन्यातुधाना नृचक्षः.. (९)
हे अग्नि! तुम अपने तीखे तेज से हमारे यज्ञ की रक्षा करो. हे उत्तम ज्ञान वाले अग्नि!
इस यज्ञ को धन के अनुकूल बनाओ. हे प्रदीप्त एवं मानवदर्शक अग्नि! तुम राक्षसों को मारो.
वे तुम्हें न मार सकें. (९)
नृचक्षा रक्षः परि पश्य विक्षु तस्य त्रीणि प्रति शृणीह्यग्रा.
तस्याग्ने पृष्टीर्हरसा शृणीहि त्रेधा मूलं यातुधानस्य वृश्च.. (१०)
हे मानवदर्शक अग्नि! तुम मानवहिंसक राक्षस को देखो तथा उसके तीन मस्तकों को
काट डालो. (१०)
त्रियातुधानः प्रसितिं त एत्वृतं यो अग्ने अनृतेन हन्ति.
तमर्चिषा स्फूर्जयञ्जातवेदः समक्षमेनं गृणते नि वृङ्धि.. (११)
हे अग्नि! राक्षस तीन बार तुम्हारी लपटों में जावे. जो राक्षस असत्य से सत्य को मारता
है, उसे तुम अपने तेज से भस्म कर दो. हे जातवेद अग्नि! इस राक्षस को मेरे सामने ही
टुकड़े-टुकड़े कर दो. (११)
तदग्ने चक्षुः प्रति धेहि रेभे शफारुजं येन पश्यसि यातुधानम्.
अथर्ववज्ज्योतिषा दैव्येन सत्यं धूर्वन्तमचितं न्योष.. (१२)
हे अग्नि! गर्जन करते हुए इस राक्षस पर वह दृष्टि डालो जो तुम खुरों के समान नाखूनों
द्वारा सज्जनों को भग्न करने वाले राक्षस पर डालते हो. दध्यङ् अथर्वा ऋषि जिस प्रकार
अपने तेज से राक्षसों को मारते हैं, उसी प्रकार तुम अपने तेज से असत्य द्वारा सत्य का हनन
करने वाले राक्षस को मारो. (१२)
यदग्ने अद्य मिथुना शपातो यद्वाचस्तृष्टं जनयन्त रेभाः.
मन्योर्मनसः शरव्या३ जायते या तया विध्य हृदये यातुधानान्.. (१३)
हे अग्नि! आज स्त्रीपुरुष आपस में लड़ रहे हैं और स्तोता कड़वी बातें कह रहे हैं. इस
कारण मन में क्रोध होने पर जो बाण फेंका जाता है, उसी बाण से तुम राक्षसों का हृदय बेध
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