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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1720 of 1855

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Page 1720

दो. (१३)
परा शृणीहि तपसा यातुधानान्पराग्ने रक्षो हरसा शृणीहि.
पराचिंषा मूरदेवाञ्छृणीहि परासुतृपो अभि शोशुचानः.. (१४)
हे अग्नि! तुम अपनी गरमी से राक्षसों को जलाओ तथा अपने तेज से राक्षसों को
समाप्त करो. मूढ़ राक्षसों को तुम अपने परम तेज से नष्ट करो. जो राक्षस दूसरों के प्राण
हरण करके तृप्त होते हैं, उन्हें तुम शोकमग्न करो. (१४)
पराद्य देवा वृजिनं शृणन्तु प्रत्यगेनं शपथा यान्तु तृष्टाः.
वाचास्तेनं शरव ऋच्छन्तु मर्मन्विश्वस्यैतु प्रसितिं यातुधानः.. (१५)
आज महान् देव पापी राक्षस को समाप्त करें. हमारी बुरी उक्तियां इस राक्षस को लगें.
हमारे बाण इस असत्यवादी राक्षस को लगें. राक्षस व्याप्त अग्नि के जाल में फंसे. (१५)
यः पौरुषेयेण क्रविषा समङ्क्ते यो अश्व्येन पशुना यातुधानः.
यो अघ्न्याया भरति क्षीरमग्ने तेषां शीर्षाणि हरसापि वृश्च.. (१६)
हे अग्नि! जो राक्षस पुरुष का मांस अपने पास लाता है. जो अश्व आदि उपयोगी पशुओं
का मांस एकत्र करता है अथवा जो गाय का दूध चुराता है, उसके सिर को काट दो. (१६)
संवत्सरीणं पय उस्रियायास्तस्य माशीद्यातुधानो नृचक्षः.
पीयूषमग्ने यतमस्तितृप्सात्तं प्रत्यञ्चमर्चिषा विध्य मर्मन्.. (१७)
हे मानवदर्शक अग्नि! गाय के एक वर्ष तक के दूध को राक्षस न पी सकें. जो राक्षस
इस अमृततुल्य गोदुग्ध को पीने के लिए आगे आवे, उसके मर्म को तुम अपनी ज्वालाओं द्वार
छिन्न-भिन्न कर डालो. (१७)
विषं गवां यातुधानाः पिबन्त्वा वृश्च्यन्तामदितये दुरेवाः.
परैनान्देवः सविता ददातु परा भागमोषधीनां जयन्ताम्.. (१८)
हे अग्नि! राक्षसों द्वारा दिया हुआ गोदुग्ध विष हो जाए एवं राक्षस काटकर अग्नि को
भेंट किए जावें. सूर्य इन राक्षसों को हिंसकों को सौंप दें. राक्षस ओषधियों का असार अंश
प्राप्त करें. (१८)
सनादग्ने मृणसि यातुधानान्न त्वा रक्षांसि पृतनासु जिग्युः.
अनु दह सहमूरान्क्रव्यादो मा ते हेत्या मुक्षत दैव्यायाः.. (१९)
हे अग्नि! तुम बहुत समय से राक्षसों को बाधा पहुंचा रहे हो. राक्षस तुम्हें युद्ध में नहीं
जीत पाए. तुम मांसभक्षक राक्षसों को समूल नष्ट करो. वे तुम्हारे दिव्य आयुधों से बच न
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