रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 17, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ें( १३ )
आश्चर्य से भर जाता है और धीरे-धीरे वह उस शक्ति-सपन्न व्यक्ति के महत्त्व की
अनुभूति करने लगता है । उसके उपरात उसकी प्रशसा करने की इच्छा सहज ही उसके
मन में जागरित होती है । महान् व्यक्ति की प्रशसा करने की यह इच्छा ही भक्ति की
पहली सीढ़ी है । रंगनाथ रामायण के प्रतिभावान् रचयिता ने अपनी रचना के द्वारा
यही कार्य संपन्न किया ।
रंगनाथ रामायण वाल्मीकिरामायण का मात्र अनुवाद नहीं है । स्थूल रूप से
वाल्मीकिरामायण की कथा इसमें आ तो गई है, किन्तु उसके कवि ने बीच-बीच में
ऐसे प्रसंग भी जोड़े हैं, जो कदाचित् उस समय तक जनता के बीच लोक-कथाओ के रूप
में प्रचलित हो चुके थे । हम नीचे ऐसे कुछ प्रसगो का उल्लेख करेंगे, जो वाल्मीकि-
रामायण में नहीं मिलते, यद्यपि उनमें से कुछ प्रसंग जैनग्रन्थो में मिलते हैं । कदाचित्
कवि ने वहीं से इन प्रसगो को लेकर अपनी रामायण में सम्मिलित कर दिया हो
१. जंबुमाली का वृत्तात, २. रावण से तिरस्कृत हो विभीषण का अपनी माता के
पास जाना, ३ कैकेसी (रावण की माता) का रावण को हितोपदेश, ४. रावण का राम की
धनुर्विद्या-कुशलता की प्रशसा करना, ५. गिलहरी की भक्ति, ६. नागपाश में बद्ध होकर
राम-लक्ष्मण के पास नारदजी का आना, ७. रावण के आगे मदोदरी का राम की महिमा
एवं शौर्य की प्रशसा करना, ८. दूसरी बार सजीवनी लाते समय हनुमान् तथा माल्यवान्
का युद्ध, ६. कालनेमि का वृत्तात, १०. सुलोचना का वृत्तात, ११. शुक्राचार्य के आगे रावण
का दुखड़ा रोना, १२. रावण का पाताल-होम, १३. अंगद का रावण के समक्ष
मदोदरी को बुला लाना, १४. रावण की नाभि में स्थित अमृत-कलश को
सोखने के निमित्त आग्नेयास्त्र का प्रयोग करने की विभीषण की सलाह,
१५ लक्ष्मण की हँसी ।
उक्त प्रसंगों में जंबुमाली का वृत्तांत, कालनेमि का वृत्तात, रावण के समक्ष अंगद
का मंदोदरी को घसीटकर लाना, आग्नेयास्त्र का प्रयोग करने की विभीषण की सलाह
आदि ऐसे हैं, जो मूलकथा की घटनाओ को अधिक तर्क-सगत सिद्ध करने के निमित्त
जोड़े हुए प्रतीत होते हैं। रावण से तिरस्कृत होकर विभीषण का अपनी माता के पास
जाना, कैकेसी का हितोपदेश और सुलोचना का वृत्तात आदि रावण के परिवार के लोगो
के चरित्र पर प्रकाश डालने के साथ ही साथ इस ओर भी इगित करते हैं कि रावण
भूत-प्रेतो का वशज एव भूत-प्रेतो का राजा नहीं था, किन्तु एक विलक्षण परिवार में
उत्पन्न हुआ विशिष्ट व्यक्ति था । रावण का, राम की धनुर्विद्या की कुशलता की प्रशसा
करना, मंदोदरी का रावण के समक्ष श्रीराम की महिमा एव पराक्रम की प्रशंसा करना,
गिलहरी का वृत्तात आदि प्रसंग राम के उस लोकोत्तर व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हैं,
जो शत्रुओ की भी प्रशंसा प्राप्त करने की क्षमता रखता था । साथ ही साथ, वे रावण
तथा मंदोदरी के चरित्र पर भी प्रकाश डालते हैं । उक्त प्रसगो के अलावा इस रामायण
में यत्र-तत्र ऐसे वर्णन भी मिलते हैं, जो वाल्मीकिरामायण में नहीं मिलते, किन्तु जिन्हें
कवि ने वैदिक धर्म में लोगो की निष्ठा बढाने के निमित्त जोडा है ।