रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीः ॥
अथ रामचन्द्रिका-सटीककी-
विषयानुक्रमणिका।
सं. प्र. विषय. पृष्ठांक.
१ यहि पहिले परकाशमें, मङ्गल चरण विशेषि।
ग्रन्थारम्भरु आदिकी, कथा लहहिं बुध लेखि ॥ १-२०
२ या द्वितीय परकाशमें, मुनिआगमन प्रकाश।
राजासों रचना वचन, राघव चलन विलास ॥ २१-२६
३ कथा तृतीय प्रकाशमें, वन वर्णन शुभ जानि।
रक्षण यज्ञ मुनीशको, श्रवण स्वयंवर मानि ॥ २७-३४
४ कथा चतुर्थ प्रकाशमें, बाणासुर सम्बाद।
रावणसों अरु धनुषसों, दशमुख बाण विषाद् ॥ ३५-४०
५ यह प्रकाश पञ्चम कथा, राम गवन मिथिलादि।
उद्धारण गौतम धरनि, स्तुति अरुणोदय आदि ४१-५३
६ छठै प्रकाश कथा रुचिर, दशरथ आगमजानि।
लगनोत्सव श्रीरामको, व्याह विधान बखानि ॥ ५३-६७
७ या प्रकाश सप्तम कथा, परशुराम सम्वाद।
रघुवरसों अरु रोष त्यहि, भञ्जन मान विषाद् ॥ ६७-८०
८ यह प्रकाश अष्टम कथा, अवध प्रवेश बखानि।
सीतावरण्यो दशरथहि, और बन्धुजन मानि ॥ ८०-८४
९ यह प्रकाश नवमें कथा, राम गमन वनजानि।
जनक नन्दिनीको सुकृत, वर्णन रूप बखानि ॥ ८४-९५
१० यह प्रकाश दशमें कथा, आवन भरत सुनाम।
राज मरण अरु तासुको, बसिबो नन्दीग्राम ॥ ९५-१०२
११ एकादशे प्रकाशमें, पञ्चवटीको वास।
शूर्पणखाके रूपको, रघुपति करि हैं नाश ॥ १०२-१११
१२ या द्वादश प्रकाश खर दूषण त्रिशिरा नाश।