रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका ।
जैसे कि, हिन्दी रसिक हरिभक्तिपरायण सुजन जन रामा-
यणादि रामचरित्र पढ़कर अपार आनंद भोगते हैं वैसेही यह
रामचन्द्रिकाभी हरिचरित्रका अपार समुद्र लहरारहा है इसकी
एकही लहर लेनेसे आनंदही नहीं बरन् भुक्ति और मुक्तिभी
मिलती है, रामचरणमें अनुराग बढ़कर पुरुष अतुल कीर्तिका
भागी होता है यद्यपि केशवदासकी कविता बहुत कठिन और
ललित है ( जैसे कि-देनो न चाहै विदाई नरेश तो पूछत
केशवकी कविताई ) तथापि इसकी टीका ऐसी मनोविलास
बुद्धिप्रकाश लोक रंजनार्थ परम उत्कृष्ट हुई है कि, बारहखडी
जाननेवालाभी उत्तम रीतिसे पठनका फल प्राप्त कर सकताहै
इसमें रामचन्द्रजीका अपूर्व चरित्र सर्वत्र यथाक्रम वर्णितहै
इसके सिवाय काव्यनिरूपणभी ऐसा उत्तमहै कि, लोक देख-
नेसेही सन्तुष्ट होंगे अधिक प्रशंसा व्यर्थ है. आशा है कि,
सूर्य्यकी किरणों सहश इसकी प्रतियेंभी सारे संसारमें गुण-
ग्राहकोंके पास शीघ्र फैल जायँगी और वे अपने विशालने-
त्रोंसे इसका अवलोकन पठन स्वाद सदासर्वदा हृदयकम-
लमें धारण करेंगे.
आपका कृपापात्र-
खेमराज श्रीकृष्णदास,