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सर्वकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 31, कुल 268 में से

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( १२ )
from अस्मद् । वपुः—body. Decline as—वपुः, वपुषी,
वपूंषि । वपुः, वपुषी, वपूंषि । वपुषा etc. पेलवम्—मृदु tender.
शिरीषपुष्पम् — the flower of शिरीष ( सिरस—हिन्दी ) is
well-known for its softness and is often used as
standard of comparison ( उपमान ) to indicate that
quality. पदं—पदन्यासं placing of feet ; sitting. सहेत—
may bear. Potential ( विधिलिङ् ) of √ सह् ‘to bear,’
which is an आत्मनेपदी root. पतत्रिणः—( पतत्र+इनिः )
पतन्तं त्रायन्ते इति पतत्राणि । पतत्राणि means wings,
because they keep birds from falling : then, पतत्राणि
सन्ति येषां ते पतत्रिणः पक्षिणः those possessed of wings,
i. e., birds. The suffix इनि is added by ‘अत इनिठनौ’
पा० ५. २. १ १५ ।
The verse provides a good example of दृष्टान्त
अलङ्कार which is defined as ‘दृष्टान्तस्तु स्वधर्मस्य वस्तुनः
प्रतिबिम्बनम्’ साहित्यदर्पण ।
CHANGE OF VOICE :—वत्से ! मनोपिताभिः देवताभिः गृहेषु
भूयते; तपसा क्व, तादृकेन वपुषा च क्व ( भूयते ) ? पेलवेन शिरीष-
पुष्पेण भ्रमरस्य पदं सह्येत पतत्रिणः पुनः न ॥ ४ ॥
HINDI TRANSLATION :—पुत्रि, मन से चाहे जाने योग्य
देवता ( हमारे ) घर में हैं ; कहाँ तो यह ( कठोर ) तप और
कहाँ तुम्हारा ( कोमल ) शरीर ! सिरस का कोमल फूल भौरें के
पैर ( रखने ) को तो सह सकता है परन्तु पक्षी के नहीं ॥ ४ ॥
ENGLISH TRANSLATION :—In the house are such
deities as your mind would long for. Child, how widely
different are penance and thy body ? The delicate