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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 492 of 918

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Page 492

४०४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ पाँचवां अधिकरण

(१) बहिर्विहारगतो वा दूष्यानासन्नावासान् पूजयेत् । तेषां देवीव्य-
ञ्जना वा दुःस्त्री रात्रावावासेषु गृह्येतेति समानं पूर्वेण ।
(२) दूष्यमहामात्रं वा 'सूदो भक्षकारो वा ते शोभनः' इति स्तवेन
भक्ष्यभोज्यं याचेत । बहिर्वा क्वचिदध्वगतः पानीयं तदुभयं रसेन योज-
यित्वा प्रतिस्वादने तावेवोपयोजयेत् । तदभिविख्याप्य 'रसदाविति'
घातयेत् ।
(३) अभिचारशीलं वा सिद्धव्यञ्जनो गोधाकूर्मकर्कटकूटानां लक्षण्या-
नामन्यतमप्राशनेन मनोरथानवाप्स्यसीति ग्राहयेत् । प्रतिपन्नं कर्मणि रसेन
लोहमुसलैर्वा घातयेत् 'कर्मव्यापदा हत' इति ।
(४) चिकित्सकव्यञ्जनो वा दौरात्मिकमसाध्यं वा व्याधिं दूष्यस्य
स्थापयित्वा भैषज्याहारयोगेषु रसेनातिसंदध्यात् ।

उन शस्त्रधारी तीक्ष्ण पुरुषों को गिरफ्तार कर लें । वयान में वे कहें कि इन दूष्य लोगों ने राजा को मारने के लिए हमें हथियार लाने को कहा है । तदनन्तर नगर भर में यह बात फैला दी जाय कि वे महामात्र राजा को मारना चाहते थे । इस अपराध में उन्हें प्राण दण्ड दिया गया । उन गिरफ्तार तीक्ष्ण पुरुषों के स्थान पर दूसरों को ही मरवा दिया जाय ।

(१) अथवा प्रवास के लिए गया हुआ राजा अपने पास ठहरे हुए उन दूष्य लोगों का खूब आदर-सत्कार करे । फिर किसी व्यभिचारिणी स्त्री को महारानी के वेष में उनके पास भेज दे, फिर सिपाहियों से वहीं पर उन्हें गिरफ्तार करवा ले, और इसी अपराध से उनका वध करवा डाले ।

(२) अथवा राजा, दूष्य महामात्र से यह तारीफ करके 'तुम्हारे रसोइये और पकवान बनाने वाले बड़े ही निपुण हैं' कुछ खाने को माँगे । या इसी प्रकार का बहाना बनाकर पीने के लिए पानी माँगे; तदनन्तर उनमें विष मिला कर 'लीजिए, पहिले आपही ग्रहण कीजिए' ऐसा कहकर उनको मरवा दे; और तदनन्तर रसोइयों पर विष देने का अपराध लगाकर उन्हें प्राणदण्ड की सजा दी जाय ।

(३) अथवा सिद्ध पुरुष के वेष में गुप्तचर महामात्र से कहे 'अच्छी नस्ल के गोह, कछुआ, केंकड़ा और टूटे हुए सींग वाले हिरण आदि में से किसी एक को यदि अभिचारिक विधि से श्मशान में पकाकर खाया जाय तो सारे मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। जब महामात्र इसके लिए राजी हो जाय तो उसे जहर मिलाकर या लोहे के मूसल से कूटकर मार दिया जाय और यह प्रचार कराया जाय कि साधना में व्यति पात हो जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई ।

(४) अथवा चिकित्सक के वेष में गुप्तचर महामात्र के पास जाकर कहे कि