कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in contextप्र० ८६ : अ० १ ] राजद्रोही अधिकारियों हेतु दण्ड-विधि ४०९
(१) सूदारालिकव्यञ्जना वा प्रणिहिता दूष्यं रसेनातिसन्दध्युः । इत्युपनिषत्प्रतिषेधः ।
(२) उभयदूष्यप्रतिषेधस्तु । यत्र दूष्यः प्रतिषेद्धव्यस्तत्र दूष्यमेव फल्गुबलतीक्ष्णयुक्तं प्रेषयेत्—‘गच्छामुष्मिन्दुर्गे राष्ट्रे वा सैन्यमुत्थापय हिरण्यं वा, वल्लभाद्वा हिरण्यमाहारय, वल्लभकन्यां वा प्रसह्यानय । दुर्गसेतुवणिक्पथशून्यनिवेशखनिद्रव्यहस्तिवनकर्मणामन्यतमं वा कारय, राष्ट्रपाल्यमन्तपाल्यं वा । यश्च त्वा प्रतिषेधयेन्न वा ते साहाय्यं दद्यात्, स बन्धव्यः स्यादिति । तथैवेतरेषां प्रेषयेत्—‘अमुष्याविनयः प्रतिषेद्धव्यः’ इति । तमेतेषु कलहस्थानेषु कर्मप्रतिघातेषु वा विवदमानं तीक्ष्णाः शस्त्रं पातयित्वा प्रच्छन्नं हन्युः । तेन दोषेणेतरे नियन्तव्याः ।
(३) पुराणां ग्रामाणां कुलानां वा दूष्याणां सीमाक्षेत्रखलवेश्ममर्यादासु द्रव्योपकरणसस्यवाहनहिंसासु प्रेक्षाकृत्योत्सवेषु वा समुत्पन्ने कलहे तीक्ष्णै-
उसको दुराचार से उत्पन्न या असाध्य रोग हो गया है और चिकित्सा करते समय औषधि या भोजन में विष मिलाकर उसको मार डाले ।
( १ ) अथवा रसोइया तथा हलवाई आदि पकी चीजों में विष मिलाकर उस महामात्र को मार डाले । यहाँ तक गुप्त रूप से दूष्यों के निग्रह के ढंग बताये गये ।
( २ ) दो दूष्य पुरुषों को किस प्रकार एक ही साथ विनष्ट किया जा सकता है, अब इसका उपाय बताया जाता है । जहाँ एक दूष्य को काबू में करना हो, वहाँ दूसरे दूष्य के साथ थोड़ी-सी सेना और कुछ तीक्ष्ण पुरुष भेजे । उस दूष्य से यह कहा जाय कि अमुक किले या प्रान्त में जाकर वह सेना के लिए योग्य व्यक्तियों की भर्ती करे । अथवा उसको आज्ञा दी जाय कि वह सुवर्ण या धन जमा करे या अमुक अध्यक्ष का धन चुराये, या अमुक अध्यक्ष की कन्या को बलात् चुरा ले, या अमुक स्थान पर मकान तथा दुर्ग बनाये, व्यापारियों के मार्ग को ठीक करे, या जंगल में मकान बनाये, अथवा अमुक खानों या लकड़ी-हाथी के जंगलों में ऐसा कार्य करे, या राष्ट्रपाल अथवा अंतपाल के कार्यों को करे । उसे यह भी ससभा दिया जाय कि यदि उसके इन कार्यों में कोई रुकावट डाले या सहयोग न दे तो उसे गिरफ्तार किया जाय । इसी प्रकार दूसरे दूष्यों को मौखिक सूचना भेजी जाय कि वे अमुक व्यक्ति की उद्दण्डता को रोकें । इस प्रकार उनमें परस्पर विवाद पैदा होने पर झगड़ैल दूष्य को तीक्ष्ण नामक गुप्तचर गुप्तरूप से मार डालें । तदनंतर राजा के पुरुष उस हत्या का दोष दूसरे दूष्य पर आरोपित करके उसे भी मरवा दें ।
( ३ ) राजद्रोही नगरों, गांवों, कुलों की सीमाओं, खेत, खलिहान, मकानों की सीमा, सुवर्ण, वस्त्र, अन्न तथा सवारी आदि का नाश कर देने से, तमाशों-उत्सवों में