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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 491 of 918

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Page 491

प्र० ८६ : अ० १ ] राजद्रोही अधिकारियों हेतु दण्ड-विधि ४०७

यौवराज्यकालं त्वां महामात्रभयान्नाभिषिञ्चामि' इति । तं सत्री महामात्र-वधे योजयेत् । विक्रान्तं तत्रैव घातयेत्—'पितृघातकोऽयम्' इति ।

(१) भिक्षुकी वा दूष्यभार्यां सांवननिकीभिरोषधिभिः संवास्य रसेना-तिसन्दध्यात् । इत्याप्यप्रयोगः ।

(२) दूष्यमहामात्रमटवीं परग्रामं वा हन्तुं कान्तरव्यवहिते वा देशे राष्ट्रपालामन्तपालं वा स्थापयितुं नागरस्थानं वा कुपितमवग्रहीतुं सार्था-तिवाह्यं प्रत्यन्ते वा सप्रत्यादेयमादातुं फल्गुबलं तीक्ष्णयुक्तं प्रेषयेत् । रात्रौ दिवा वा युद्धे प्रवृत्ते तीक्ष्णाः प्रतिरोधकव्यञ्जना वा हन्युः—'अभियोगे हतः' इति ।

(३) यात्राविहारगतो वा दूष्यमहामात्रान् दर्शनायाह्वयेत् । ते गूढ-शस्त्रैस्तीक्ष्णैः सह प्रविष्टा मध्यमकक्ष्यायामात्मविचयमन्तःप्रवेशार्थं दद्युः । ततो दौवारिकाभिगृहीतास्तीक्ष्णा 'दूष्यप्रयुक्ताः स्म' इति ब्रूयुः । ते तदभि-विख्याप्य दूष्यान् हन्युः । तीक्ष्णस्थाने चान्ये वध्याः ।


एकान्त में ले जाकर राजा उसका अच्छा सत्कार करे और तदनन्तर कहे 'तुम्हें युवराज पद मिलने का समय आ गया है । महामात्र के भय से मैं तुम्हारा अभिषेक नहीं कर पा रहा हूँ ।' फिर सत्री उस लड़के को उसके पिता महामात्र की हत्या करने के लिए तैयार करें । जब वह महामात्र की हत्या कर डाले तो पितृघातक का लांछन लगाकर राजा उसको भी मरवा दे ।

( १ ) अथवा भिक्षुकी नामक गुप्तचर स्त्री दूष्य आदि की स्त्री से कहे कि 'मैं वशीकरण की औषधि को जानती हूँ । तुम इस औषधि को अपने पति को खिलाना' । इस प्रकार औषधि की जगह विष देकर राजद्रोहियों को मारा जाय । इस कार्य को आप्य-प्रयोग कहते हैं ।

( २ ) राजा को चाहिए कि वह दूष्य महामात्र, जङ्गल के निरीक्षक और बगा-वती गाँव को मारने के लिए तीक्ष्ण पुरुषों के साथ थोड़ी-सी सेना इस उद्देश्य या बहाने से भेज दे कि अमुक-अमुक्त स्थान-नगरों में अन्तपाल या राष्ट्रपाल की स्थापना करनी है; या अमुक नगर की प्रजा विरुद्ध हो गई है उसको वश में करना है; अथवा सेना भेजने का यह बहाना बताये कि अमुक राज्य की सीमा पर दूसरे राज्य के कृषकों ने हमारी भूमि अपने कब्जे में कर ली है । तदनन्तर रात या दिन में लड़ाई लगाकर चोर या डाकुओं के वेष में तीक्ष्ण पुरुष अभीष्ट लोगों को मार डालें, और मारने के बाद यह प्रचारित करें लड़ाई में मारा गया है ।

( ३ ) तीर्थयात्रा या बिहार के लिए प्रस्तुत राजा दूष्य महामात्रों को देखने के लिए अपने पास बुलाये । शस्त्र छिपाये तीक्ष्ण पुरुष भी उन महामात्रों के साथ-साथ राजा के पास भीतर जाय । राजभवन की दूसरी ड्योढ़ी पर तलाशी लेकर द्वारपाल