कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
DevanagariHindipublished259 pages
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३७८ ] कल्कि पुराण
पावन तीर पर अपनी सेना सहित निवास किया ॥४६॥ अपने परिजनो
के सहित कल्किजी ने वह रात्रि वही बिताई और प्रात काल उठने पर
गगा स्नान के निमित्त आये हुए मुनिगण उनके दर्शनार्थ आते हुए
दिखाई दिये ॥४७ ॥ वे हरिद्वार मे गगातट के समीप स्थित पिण्डारक
बन मे अपनी सेना के सहित निवास करने लगे । एक दिन, जब वे
कलिमल-नाशिनी भगवती जाह्नवी की स्तोत्रो के द्वारा स्तुति कर रहे
थे, तभी मुनिगण उनके दर्शनार्थ वहां आये और विविध शब्दो से युक्त
स्तोत्र करने लगे ॥ ४८ ॥