Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 355 of 442

Read in context
Page 355

३५८ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
इसके पूजन में बारह योगिनियाँ कीर्तित की गई हैं, उनके शुभ नाम
से हैं, क्षेमकारी, शांता, वेदमाता, महोदरी, कराला, कामदा, भगास्या,
भगमालिनी, भगोदरी, भगारोहा, भगजिह्वा, भगा, ये द्वादश योगिनियाँ
हैं जिनका पूजन कहा गया है । देवी स्वयं ही विचरण करती हुई
जहाँ-तहाँ पर गमन किया करती हैं । जिस प्रकार से अन्यों की हुआ
करती है वैसे ही पुनः ये योगिनियाँ सखियाँ होती हैं । चण्डिका की
योगिनियाँ यहाँ पर सब सखियाँ बताई गई हैं । ये सब रीति से
आपके-सामने अंग मंत्र संक्षेप में वर्णित कर दिए गए हैं । अब आप
दोनों के समक्ष में कामाख्या देवी का कल्पमात्र महात्म्य बताता हूँ ।
नृप धर्म कथन
ऋषियों ने कहा--आपने सर्ग का वर्णन किया और जो भी कुछ
संशय उसमें हुए थे उनका भी आपने निवारण कर दिया है । हे गुरो!
आपके प्रसाद से, हे महाभाग! हम कृत-कृत्य हो गए हैं । हे द्विजात्मा
फिर हम आपसे कुछ श्रवण करना चाहते हैं यह अन्य भृंगी महाकाल
कौन है जो यह वेताल तथा भैरव समुत्पन्न हुए हैं । बेताल को महाकाल
और भृंगी भैरव को हम सुनते हैं । इनका चतुष्टय कैसे हुआ अर्थात्
चार कैसे हो गए थे । मार्कण्डेय मुनि ने कहा-हे द्विजोत्तमो! महाकाल
के भूमण्डल में उत्पन्न होने पर और मनुष्यत्व में भृंगी के होने पर उन
दोनों से ये बेताल और भैरव नामों वाले समुद्भूत हुए थे । वेताल को
वरदान प्राप्त होने पर और उसके साथ भैरव के संगत हो जाने पर
भगवान् हर ने तप से युक्त अन्धक को भृंगी कर दिया था । अन्धक
पहले हर से विरुद्ध होकर आपदा में फँस गया था । इससे उसने
भगवान् हरि की समाराधना की थी और उनका पुत्र हुआ था । भगवान्
हरि ने स्नेह से उसका नाम भृंगी रख दिया था । भगवान् हरि ने स्नेह
से जो महाकाल में था उसको बलि का पुत्र बाण कर दिया । भगवान्
विष्णु के द्वारा कटे हुए बाहुओं वाले को महाकाल बना दिया था । इस
प्रकार से, हे मुनिवरो! उनका चार होना संयत होता है । अनुक्रम से
वेताल, भैरव, भृंगी और महाकाल है ।