कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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था उस समय में उसको यह विस्तारपूर्वक क्रम से बहुला के साथ
सावित्री से कहा था।
इसके अनन्तर इसके वचन का श्रवण करके जो भी पूर्व जन्म में
हुआ था। उस समय में यह सुन करके मेरे मन में जो था वह मैंने जान
लिया था। इस रीति से वह अत्यधिक लज्जा को प्राप्त कर नीचे की
ओर मुख वाली हो गई थी और सावित्री के वचन से वह पूर्व जन्म के
स्मरण वाली हो गई थी। उसी भाँति अधोमुखी होकर पूर्व जन्म में जो
भी हुआ था उस समय में उस दिव्य ज्ञान वाली अरुन्धती ने सब
घटनाओं का स्मरण किया था। पहले भगवान् विष्णु के प्रसाद से वह
दिव्य दर्शन होकर इस समय में वह दिव्य दर्शन वाली बाल्यभाव के
द्वारा प्रच्छन्न हो गई थी। सावित्री के वचन का श्रवण करके पूर्व जन्म
में वृतान्त को सबको प्रत्यक्ष की ही भाँति वह सम्पूर्ण पूर्व ज्ञान को प्राप्त
करने वाली हो गयी थी। पूर्व ज्ञान की प्राप्ति करके जो पहले भगवान
विष्णु ने दिया था कि मैंने पूर्ण जन्म में इन्हीं वशिष्ठ मुनि का अपने
स्वामी के स्थान में वरण किया था। इस ज्ञान के रखने वाली वह देवी
अरुन्धती स्वयं ही परम आमोद से समन्वित हो गयी थी और वशिष्ठ
मुनि ने दर्शन से पूर्व में उसकी कामवासना के अद्भुत होने का भी पूर्ण
ज्ञान हो गया था।
जिस प्रकार से उसके मन में सतीत्व के निवारण करने में आतंक
समुत्पन्न हो गया था उस समय में उस मेधातिथि की पुत्री ने उस समय
में उस आतंक को स्वयं ही त्याग दिया था। इसके उपरान्त चिन्ता को
त्याग देने वाली उस अरुन्धती सती को समझकर तब सावित्री सूर्यदेव
के भवन को चली गई थी। इसके अनन्तर सावित्री अरुन्धती को उस
सूर्यदेव के मन्दिर में बिठाकर वह सर्वज्ञा और श्रेष्ठ सती सावित्री
ब्रह्माजी के भवन को चली गई थी वहाँ पर ब्रह्माजी को प्रणाम किया
था और ब्रह्माजी के द्वारा पूछी गई उस सावित्री से अमित ओज वाले
ब्रह्माजी ने कहा था- हे भगवान्! आप तो समस्त जगतों के स्वामी हैं।
आपके पुत्र वशिष्ठ मुनि को मानस पर्वत के शिखर पर उस सती