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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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[Header] १३० ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
समय आपका वपु पूर्व की ही भाँति सम्भूत होगा। ओज और वीर्य से
अद्भुतकान्त अक्षय और सुधात्मक अर्थात् सुधा से परिपूर्ण हर अंग की
सन्धियों वाला आपका शरीर परम सुन्दर हो जायेगा।
मार्कण्डेय मुनि ने कहा-लोकों के पितामह ब्रह्माजी ने इस प्रकार
से सुधांशु (चन्द्रमा) से कहकर चन्द्र के क्षय के लिए और आधे मास
तक वृद्धि के लिए यत्नों वाले हुए थे। जैसा प्रजापति दक्ष ने कहा था
कि चन्द्रमा आधे मास तक क्षय और वृद्धि को प्राप्त होवे उस मासार्ध
में विधाता ने यत्न किया था। फिर सुरों में ज्येष्ठ ने चन्द्रमा को सोलह
प्रकार से विभक्त किया था और ऐसा विभाग करके समस्त देवों से
वे यह उत्तम वचन बोले थे। चन्द्रमा की सोलह कलायें हैं उनमें एक
भगवान् शम्भु के मस्तक में आज की अवधि पर्यन्त स्थित रहे और
पराक्षय के बिना ही क्षय को प्राप्त होंवे। दक्ष के वाक्य से यदि क्षय
रोग से मासार्ध तक क्षय के लिए चन्द्र प्रपीड़ित किया जाता है तो उस
समय में उपशान्ति नहीं होगी किन्तु जिसकी जो कला शम्भु में है
ज्योत्सना उसके ही प्रति गमन करे। हे सुरोत्तमो! प्रतिमास में चौदह
कलाओं की संस्था है। आप लोग प्रतिपदा तिथि से आरम्भ करके
चतुर्दशी पर्यन्त चतुर्दश की संस्थाओं से भी तथ्यों का पालन करें।
तेजों के लोग चतुर्दशी तिथि में क्रम से सूर्य के विम्ब में प्रवेश
करें। इस प्रकार से कृष्णपक्ष में चन्द्र का क्षय होता है। शेष कला
हरित्यन्त्र में पलायित दर्श में जावें। उस तिथि में निशापति के प्रथम
भाग में स्थित रहे। द्वितीय दर्श भाग में रोहिणी के मन्दिर में गमन करे।
तीसरे भाग में तो सरस्वती में स्नान करके चन्द्र समुत्थित होता है।
विभावस्तु के चतुर्थ तिथि भाग में वह बल से सम्पूर्ण होता है। विम्ब
में स्थित घोटक के सहित यह चन्द्रमा मण्डल में जावे। जितने समय
पर्यन्त प्रथमा कला क्षय को प्राप्त होवे इसी प्रकार से कृष्णपक्ष में तब
तक वह प्रतिपदा होती है। द्वितीयादि में कृष्णपक्ष में उसी प्रकार की
वृद्धि तथा ह्रास होता है। तिथियों की वृद्धि का हेतु शुक्ल और कृष्ण
में उसी भाँति होता है। इसके अनन्तर फिर शुक्ल पक्ष में जब तक पूर्व