कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context§०३ श्रीकालिका पुराण ०३ १२९
में स्थित है क्योंकि आप ज्योत्स्ना से और सुधा से उसी से हीन हैं ।
इसके उपरान्त आपकी अंग संधियां, हे राजन! इस समय में सीदित हो
रही हैं। उपाय भी मैं करूँगा जिससे आप किसी पीड़ा को प्राप्त न होवें ।
पुर के अध्वर में प्राजापत्य पुरोडाश का हवन करना चाहिए।
इसके उपरान्त ऐन्द्र और पीछे आग्नेय सभी ऋतुओं में देना चाहिए।
इसके अनन्तर आपका भाग पुरोडाश मैंने किया है। उस भाग के भोग
करने वाले जो नित्य ही यज्ञ के द्वारा कृत है पूर्व की ही भाँति आपका
उत्साह और श्याम वीर्य हो जायेगा। जो आपके अमृत के कण क्षीरोद
के जल में स्थित हैं अथवा आपके शरीर का चूर्ण और ज्योत्स्ना के
जो लव हैं । हे विभो! वह सब आपकी ज्योत्स्ना योग से अनुदिन वृद्धि
को प्राप्त होगा जो निरन्तर क्षीर सागर के गर्भ में गमन करने वाला है।
द्वितीय स्वरोचिष के अन्तर के प्राप्त होने पर शंकर के अंश से जायमान
दुर्वासा विप्र सूर्य की ही भाँति प्रचण्ड और चण्ड होगा। उसने देवेन्द्र
के अविनय से सदारुण शाप दे दिया था। सुर और असुरों से सहित
तीनों भुवनों को बिना श्री वाला कर देगा फिर लोक के श्री से हीन
होने पर लोक में विप्लव हो जायेगा। हे सोम! जिस तरह से आपके
क्षय होने से सबका विप्लव प्रवृत्त हो गया था।
वह मनुष्य के प्रमाण से तीसरे कृत युग में होगा और जब तक
चारों युग होंगे स्थित होगा। इसके अनन्तर देवों के साथ चतुर्थ कृतयुग
के सम्प्राप्त होने पर मैं शम्भु और विष्णु क्षीरोद का निर्मन्थन करेंगे।
मन्दराचल को मन्थन करके अर्थात् मथान करने का साधन बनाकर
फिर वासुकि सर्प का नेतरा बनायेंगे। यज्ञ भागों के लीन होने पर
देवान्न के लिए हम फिर देवों के साथ दानवों के साथ मिलकर क्षीरोद
का मन्थन करेंगे। आपके शरीर का यह अमृत जो क्षीरसागर में स्थित
है उसको प्रमथन करके हम राशिभूत तथा क्षय को ग्रहण करेंगे। उस
समय में हम आपके शरीर को सर्वौषधियों के अनन्तर से करके हे
विभो! आपके शरीर के लिए सागर के जल में प्रथिप्त कर देंगे। सागर
का निर्मन्थन करके और पीछे जब अमृत का समुद्धरण करेंगे तो उस