बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
by नरपति नाल्ह
DevanagariHindipublished315 pages
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- सहायक ग्रन्थों की सूची *,
'छंद, रस, और अलंकार तथा भाषा'
१. उक्ति व्यक्ति प्रकरणम्— सं० मुनि जिनविजय तथा डा० सुनीति
कुमार चाटुर्ज्या ।
२ छंदोऽनुशासनम्— संपादक प्रो०एच० डी० वेलणकर ।
३ छंद प्रभाकर— जगन्नाथ प्रसाद "भानु" ।
४. पिंगल छंद सूत्रम्— पिंगलाचार्य, स्व०पं० सीतानाथ समाध्यायी
भट्टाचार्य द्वारा सम्पादित तथा श्री
गोविन्द चन्द्र काव्यतीर्थ पुराणाशास्त्री
द्वारा संशोधित ।
५. रघुनाथ रूपक गीतारा— मंश कवि 'त० महताब चन्द्र रांकेड,
'विशारद'जयपुरवाल । 'नागरी प्रचारिणी
सभा काशी ।'
६. अपभ्रंश मीटर्स— प्रो० एच० डी० वेलणकर, 'बम्बई
यूनिवर्सिटी जर्नल १६३३-३४ पृ०
३२-३४ ।'
७. राजस्थानी लोकगीत— स्व० श्री सूर्यकिरण पारीक, एम० ए० ।
८. रस गंगाधर— जगन्नाथ पण्डितराज 'सं०—पं०
पुरुषोत्तम शर्मा चतुर्वेदी, नागरी प्रचा-
रिणी सभा ।'
६ काव्य कल्पद्रुम— कन्हैयालाल पोद्दार ।
१० हिन्दी व्याकरण— कामताप्रसाद गुरु ।
११. नोट्स आन दि ग्रामर आफ
दी ओल्ड वेस्टर्न राजस्थानी— तेस्सितोरी ।
१२. हिन्दी भाषा का इतिहास — डा० धीरेन्द्र वर्मा ।
१३. राजस्थानी भाषा — डा० सुनीति कुमार चाटुर्ज्या ।