आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
कुछ ध्यान देने योग्य बातें
कुछ ध्यान देने योग्य बातें
मल-मूत्र के विसर्जन में ध्यान दें
- ▣ मल-मूत्र को अधिक देर तक रोके रखना रोगों को आमंत्रित करना है।
- ▣ उकडू बैठकर मल-विसर्जन करें। इससे मल अच्छी तरह विसर्जित होता है।
भोजन करने में ध्यान दें
- ▣ जब मल-मूत्र का वेग हो तब भोजन नहीं करना चाहिए।
- ▣ भोजन करते समय मौन रहें।
- ▣ भोजन करते समय पानी 1-2 घूँट करके ही पिएँ। बहुत अधिक पानी भोजन के साथ मत लें। भोजन के साथ घूँट-2 पानी अमृत समान है, लेकिन बहुत अधिक पानी ठीक नहीं। भोजन के तुरंत बाद पानी मत पिएँ, यह विष समान है।
- ▣ एक बार भोजन करके दूसरी बार भोजन करने में पाँच-छः घण्टे का अंतर जरूर रखें।
- ▣ भोजन को चबा-चबाकर तरल बनाकर खाएँ।
- ▣ हो सके तो भोजन खुली-ताजी-स्वच्छ हवा और धूप में खाएँ। पर यदि कमरे में खाना हो तो ताजी हवा के आने का मार्ग बंद न करें।
- ▣ भोजन का समय भी निश्चित होना चाहिए। असमय भोजन करना भी हानिकारक हो जाता है। यदि आप शाम को 6 बजे भोजन करते हैं तो ज्यादा-से-ज्यादा साढ़े छः ही होने दें।
- ▣ सुबह पाचन-शक्ति तेज होती है, फिर यह शाम तक लगातार
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धीरे-धीरे कम होती जाती है, इसलिए भोजन का अधिक अंश सुबह ही कर लें। शाम को कम भोजन करना चाहिए और रात को सोते समय तो बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।
▣ शाम का भोजन सोने से कम-से-कम दो घण्टा पहले होना चाहिए। ऐसे में नींद भी अच्छी आयेगी।
▣ बहुत गर्म और बहुत ठण्डे खाद्य पदार्थ के सेवन से बचें।
▣ चखो पर चरो मत, चरो तो फरो, न फरो तो मरो। किसी ने कितना प्यारा कहा है। भोजन के मामले में अल्प आहारी बनें। यानी कुछ भी खाना हो, बहुत ज्यादा नहीं खाएँ। यदि ज्यादा खा लिया तो फिर सैर कर लो। यदि खुराक बहुत है और सैर भी नहीं करते हो तो जल्दी मरने के लिए तैयार रहो।
पानी पीने में ध्यान दें
▣ खड़े होकर पानी मत पिएँ।
▣ साधारणतया हररोज दो लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।
▣ सुबह उठकर एक बड़े गिलास पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना मल की सही सफाई के लिए बड़ा लाभाकारी होता है।
▣ जल घूँट-2 करके पीना चाहिए। दो-तीन सैकेण्ड मुँह में रखने के बाद ही नीचे उतारना चाहिए।
▣ जो जल आप पी रहे हैं, ध्यान रहे कि वो न अधिक गर्म हो और न अधिक ठण्डा। चाहे कितनी भी गर्मी हो, पर अधिक ठण्डे जल का सेवन मत करें। वो हानिकारक ही होता है।
▣ भूख लगने पर पानी मत पिएँ, इससे जलोदर रोग हो सकता है।
स्वच्छता में ध्यान दें
▣ साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।
▣ स्वच्छ पानी पिएँ।
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साहिब बन्दशी
- □ अत्यंत स्वच्छता से बना हुआ भोजन करें। रसोई में चप्पल का प्रयोग वर्जित कर दें।
- □ आटा गूँथते समय मुँह और नाक को चुनरी से ढक लें।
- □ स्नान किए बिना भोजन न बनाएँ।
- □ किसी का जुटा बिलकुल मत खाएँ और न ही जुठी थाली में भोजन करें।
- □ तौलिया, कंघी आदि भी जुटा न हो बल्कि अपना अलग होना चाहिए।
- □ सोने का बिस्तर साफ-सुथरा होना चाहिए।
- □ घर की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
- □ मुँह ढाँपकर मत सोएँ।
स्नान में ध्यान दें
- □ जब स्नान करें तो सबसे पहले सिर पर पानी डालें।
- □ रात के समय स्नान मत करें।
सोने और जागने पर ध्यान दें
- □ दिन में सोना ठीक नहीं है।
- □ अधिक सोना भी ठीक नहीं है।
- □ सुबह सूर्योदय से पहले जगने वाले कई रोगों से बचे रहते हैं।
- □ सुबह चार बजे जगना उत्तम है।
ब्रश करने पर ध्यान दें
- □ ब्रश करते समय दाँतों पर जोर से नहीं रगड़ें।
- □ हो सके तो दातुन जरूर करें।
- □ जो ब्रश आप कर रहे हैं, ध्यान दें कि उसके रेशे कोमल हों।