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सर्वकोश
“सिंहों के लेहँड़े नहीं, हंसों की नहिं पाँत” — कबीर

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कबीर के दोहे

सिंहों के लेहँड़े नहीं, हंसों की नहिं पाँत लालों की नहिं बोरियाँ, साधु न चलै जमात

अर्थ

शेरों के झुंड नहीं होते, हंसों की कतारें नहीं होतीं, रत्नों की बोरियाँ नहीं भरतीं, वैसे ही सच्चे साधु भीड़ बनाकर नहीं चलते।

रोमन अक्षरों में

sinhon ke lehande nahin, hanson ki nahin paant laalon ki nahin boriyaan, saadhu na chalai jamaat

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