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सर्वकोश
“शब्द सम्हारे बोलिए, शब्द के हाथ न पाँव” — कबीर

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कबीर के दोहे

शब्द सम्हारे बोलिए, शब्द के हाथ न पाँव एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव

अर्थ

शब्द सोच-समझकर बोलो। शब्द के हाथ-पाँव नहीं होते, फिर भी एक शब्द दवा बन जाता है और एक शब्द घाव कर देता है।

रोमन अक्षरों में

shabd samhaare bolie, shabd ke haath na paanv ek shabd aushdhi kare, ek shabd kare ghaav

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