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सर्वकोश
“सब धरती कागद करूँ, लेखनी सब बनराय” — कबीर

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कबीर के दोहे

सब धरती कागद करूँ, लेखनी सब बनराय सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुन लिखा न जाय

अर्थ

पूरी धरती को कागज़, सारे वनों को कलम और सातों समुद्रों को स्याही बना लूँ, तब भी गुरु के गुण पूरे नहीं लिखे जा सकते।

रोमन अक्षरों में

sab dharti kaagad karun, lekhni sab banraay saat samudra ki masi karun, guru gun likha na jaay

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