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सर्वकोश
“साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप” — कबीर

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कबीर के दोहे

साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप

अर्थ

सत्य के बराबर कोई तप नहीं और झूठ के बराबर कोई पाप नहीं। जिसके हृदय में सत्य है, उसके हृदय में स्वयं प्रभु रहते हैं।

रोमन अक्षरों में

saanch baraabar tap nahin, jhuth baraabar paap jaake hirdai saanch hai, taake hirdai aap

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