कबीर के दोहे
पीछैं लागा जाइ था, लोक बेद के साथि आगैं थैं सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथि
अर्थ
मैं लोक-रीति और शास्त्रों के पीछे-पीछे चल रहा था, तभी आगे सतगुरु मिले और उन्होंने मेरे हाथ में ज्ञान का दीपक थमा दिया।
रोमन अक्षरों में
pichhain laaga jaai tha, lok bed ke saathi aagain thain satgur milya, dipak diya haathi
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