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सर्वकोश
“पत्ता बोला वृक्ष से, सुनो वृक्ष बनराय” — कबीर

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कबीर के दोहे

पत्ता बोला वृक्ष से, सुनो वृक्ष बनराय अब के बिछुड़े ना मिलै, दूर पड़ेंगे जाय

अर्थ

गिरता पत्ता पेड़ से कहता है कि इस बार बिछुड़े तो फिर नहीं मिलेंगे, हम बहुत दूर जा पड़ेंगे। यह जीवन का अवसर लौटकर नहीं आता।

रोमन अक्षरों में

patta bola vriksh se, suno vriksh banraay ab ke bichhude na milai, dur padenge jaay

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