कबीर के दोहे
नैनों अंतर आव तू, ज्यों हौं नैन झँपेउँ ना हौं देखौं और को, ना तुझ देखन देउँ
अर्थ
हे प्रिय प्रभु, मेरी आँखों में आ जाओ, मैं पलकें बंद कर लूँ। फिर न मैं किसी और को देखूँ, न किसी और को तुम्हें देखने दूँ।
रोमन अक्षरों में
nainon antar aav tu, jyon haun nain jhampeun na haun dekhaun aur ko, na tujh dekhan deun
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