कबीर के दोहे
मधुर वचन है औषधी, कटुक वचन है तीर स्रवण द्वार ह्वै संचरै, सालै सकल सरीर
अर्थ
मीठे वचन दवा हैं और कड़वे वचन तीर। कड़वे बोल कानों के रास्ते भीतर जाकर पूरे शरीर को पीड़ा देते हैं।
रोमन अक्षरों में
madhur vachan hai aushdhi, katuk vachan hai tir sravan dvaar hvai sanchrai, saalai sakal sarir
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