कबीर के दोहे
माया छाया एक सी, बिरला जाने कोय भगता के पीछे फिरे, सनमुख भाजे सोय
अर्थ
माया और छाया एक जैसी हैं, यह कोई विरला ही जानता है। जो उससे मुँह फेर लेता है, उसके पीछे चलती है और जो उसके पीछे भागता है, उससे दूर भागती है।
रोमन अक्षरों में
maaya chhaaya ek si, birla jaane koy bhagta ke pichhe phire, sanmukh bhaaje soy
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