कबीर के दोहे
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढै बन माहिं ऐसे घटि घटि राम हैं, दुनिया देखै नाहिं
अर्थ
कस्तूरी हिरण की नाभि में ही होती है, पर वह उसे जंगल में ढूँढता है। वैसे ही राम हर हृदय में हैं, पर दुनिया उन्हें बाहर खोजती है।
रोमन अक्षरों में
kasturi kundal basai, mrig dhundhai ban maahin aise ghati ghati raam hain, duniya dekhai naahin
— Sant Kabirसर्वकोश संग्रह से।अपना सूक्ति चित्र बनाएँ →
