कबीर के दोहे
कबीरा गर्व न कीजिए, कबहूँ न हँसिए कोय अजहूँ नाव समुद्र में, ना जानौं का होय
अर्थ
कभी घमंड न करो और किसी की हँसी न उड़ाओ। तुम्हारी नाव अभी समुद्र में है, पता नहीं आगे क्या हो।
रोमन अक्षरों में
kabira garva na kijie, kabhun na hansie koy ajhun naav samudra men, na jaanaun ka hoy
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