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सर्वकोश
“कबीर सुमिरन सार है, और सकल जंजाल” — कबीर

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कबीर के दोहे

कबीर सुमिरन सार है, और सकल जंजाल आदि अंत सब सोधिया, दूजा देखौं काल

अर्थ

प्रभु का स्मरण ही सार है, बाकी सब जंजाल है। आरंभ से अंत तक सब खोजकर देख लिया, उसके सिवा सब कुछ काल के अधीन है।

रोमन अक्षरों में

kabir sumiran saar hai, aur sakal janjaal aadi ant sab sodhiya, duja dekhaun kaal

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