कबीर के दोहे
कबीर नौबत आपनी, दिन दस लेहु बजाय ए पुर पट्टन ए गली, बहुरि न देखहु आय
अर्थ
अपनी शान का नगाड़ा दस दिन और बजा लो। यह नगर, यह बस्ती और ये गलियाँ फिर लौटकर देखने को नहीं मिलेंगी।
रोमन अक्षरों में
kabir naubat aapni, din das lehu bajaay e pur pattan e gali, bahuri na dekhhu aay
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