कबीर के दोहे
झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद खलक चबैना काल का, कुछ मुँह में कुछ गोद
अर्थ
मनुष्य झूठे सुखों को सुख मानकर प्रसन्न होता है, पर पूरा संसार काल का चबैना है; कुछ उसके मुँह में हैं और कुछ गोद में।
रोमन अक्षरों में
jhuthe sukh ko sukh kahe, maanat hai man mod khalak chabaina kaal ka, kuchh munh men kuchh god
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